उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek raaz khula hum pe ye paidaish-e-gul se

इक राज़ खुला हम पे ये पैदाइश-ए-गुल से

اک راز کھلا ہم پہ یہ پیدائش گل سے

शायर: Faizan Jaffery Al-Khwarzami6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक राज़ खुला हम पे ये पैदाइश-ए-गुल से
दिल बनने को था दश्त सा गुंजाइश-ए-गुल से

होता है जिन्हें नाज़ बहुत अपने जुनूँ पर
जल जाते हैं अक्सर वही गर्माइश-ए-गुल से

ज़ुल्फ़ों को समेटे या कि चेहरे को सँवारे
मिलती नहीं फ़ुर्सत उसे आराइश-ए-गुल से

ये आब-ओ-हवा रंग-ए-फ़लक मौसम-ओ-शबनम
भरपूर हुए जाते हैं पैमाइश-ए-गुल से

अंजाम पे रिश्ता यही टूटेगा उलझ कर
आग़ाज़ है जिस का अभी फ़रमाइश-ए-गुल से

शा'इर हैं हमें अपना बना कर भी तो देखो
जी उठते हैं हम दस्तक-ए-आसाइश-ए-गुल से