उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis raat teri yaad ke lashkar nahin aae

जिस रात तिरी याद के लश्कर नहीं आए

جس رات تری یاد کے لشکر نہیں آئے

शायर: Faizan Jaffery Al-Khwarzami5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस रात तिरी याद के लश्कर नहीं आए
उस रात मिरे ख़्वाब में गौहर नहीं आए

इस बात का दुख है कि मिरे शहर में रह कर
अहबाब बुलाने पे भी अक्सर नहीं आए

फलदार दरख़्तों की कटाई से मिला सुख
इस साल मिरे सहन में पत्थर नहीं आए

कुछ लोग बहुत साल मिरे क़ुर्ब में रह कर
बेचैन तबी'अत को मयस्सर नहीं आए

दरिया तो गिरे ख़ूबी-ए-तक़दीर के हाथों
मिलने को समंदर में समंदर नहीं आए