उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq mein arz-o-samawat uTha lae hain

'इश्क़ में अर्ज़-ओ-समावात उठा लाए हैं

عشق میں ارض و سماوات اٹھا لائے ہیں

शायर: Faizan Jaffery Al-Khwarzami5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'इश्क़ में अर्ज़-ओ-समावात उठा लाए हैं
या'नी हम हिज्र के दिन-रात उठा लाए हैं

हम ने उस आँख से पोंछे हैं वफ़ा के आँसू
आप जिस आँख से आफ़ात उठा लाए हैं

हर नज़र-बाज़ हवस का ही पुजारी होगा
लोग बाज़ार से इक बात उठा लाए हैं

हम ख़रीदार थे उम्मीद-ओ-रजा के लेकिन
जेब से तंग थे सो मात उठा लाए हैं

यूँ कहीं आते न जाते हैं मगर इस दर पर
हम को इक याद के ज़र्रात उठा लाए हैं