उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq mein zaKHm-numai to nahin ho sakti

'इश्क़ में ज़ख़्म-नुमाई तो नहीं हो सकती

عشق میں زخم نمائی تو نہیں ہو سکتی

शायर: Faizan Jaffery Al-Khwarzami4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'इश्क़ में ज़ख़्म-नुमाई तो नहीं हो सकती
आग पे आबला-पाई तो नहीं हो सकती

'उम्र भर क़ैद या उस जैसी सज़ा मुमकिन है
'इश्क़ में 'ऐश-ए-रिहाई तो नहीं हो सकती

मेरे एहसास को इज़हार 'अता करते हैं
मुझ से शे'रों पे कमाई तो नहीं हो सकती

चाक-ए-दामन को मिरे चूम के ये उस ने कहा
चाक-ए-दामन की सिलाई तो नहीं हो सकती