उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek do tin chaar se pahle

एक दो तीन चार से पहले

ایک دو تین چار سے پہلے

शायर: Faizan Jaffery Al-Khwarzami13 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक दो तीन चार से पहले
बस ख़ुदा था शुमार से पहले

मेरे शहरों का हाल मत पूछो
रौशनी थी ग़ुबार से पहले

आप मुझ को मिले न थे या'नी
दिलकशी और निखार से पहले

कितने मौसम गुज़र गए यूँही
अब तो आ जा बहार से पहले

मरने देता नहीं है इक चेहरा
एक मद है उतार से पहले

हम तो अपने कभी हुए ही न थे
प्यार के बा'द प्यार से पहले

एहतिमाम-ए-विसाल कर लीजे
ज़हमत-ए-इंतिज़ार से पहले

मुझ को ख़ुद पर यक़ीं न था इक पल
आप पर ए'तिबार से पहले

एक सूरत नज़र में बनती है
दस्त-ए-नक़्श-ओ-निगार से पहले

एक सहरा है आब के ऊपर
इक समुंदर है ग़ार से पहले

ज़िक्र-ए-परवरदिगार था मौजूद
हुक्म-ए-परवरदिगार से पहले

'इश्क़ भी तोड़ फोड़ करता है
जाँच लीजे बुख़ार से पहले

और इक इश्तिहार था चस्पाँ
आप के इश्तिहार से पहले