उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main KHud se KHak-bazi kar raha hun

मैं ख़ुद से ख़ाक-बाज़ी कर रहा हूँ

میں خود سے خاک بازی کر رہا ہوں

शायर: Vikram6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं ख़ुद से ख़ाक-बाज़ी कर रहा हूँ
मैं मिट्टी फिर से मिट्टी कर रहा हूँ

ये कार-ए-बे-मआ'नी कर रहा हूँ
मैं अब भी ज़िंदगानी कर रहा हूँ

दरख़्त-ए-ज़र्द हूँ मैं इश्क़-रुत का
अयाँ इक बद-निज़ामी कर रहा हूँ

मैं उस के साथ हूँ पर ख़ुश नहीं हूँ
मुझे लगता है ग़लती कर रहा हूँ

ग़ज़ल-ख़्वानी न कर के रो पड़ूँ तो
मैं ज़ाएअ' ये उदासी कर रहा हूँ

ये दुनिया ख़त्म होती जा रही है
मैं बैठा शेर-साज़ी कर रहा हूँ