उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main kal likhunga phir ek kahani abhi kahani miTa raha hun

मैं कल लिखूँगा फिर इक कहानी अभी कहानी मिटा रहा हूँ

میں کل لکھوں گا پھر اک کہانی ابھی کہانی مٹا رہا ہوں

शायर: Vikram6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं कल लिखूँगा फिर इक कहानी अभी कहानी मिटा रहा हूँ
लबों पे बोसे की जो नमी है वो रख के उंगली मिटा रहा हूँ

मुझे बनानी है एक मूरत हो ख़्वाब-पैकर ख़याल-सूरत
बहुत ज़ियादा लगेगी मिट्टी सो अपनी हस्ती मिटा रहा हूँ

मैं चीख़ता हूँ मैं भागता हूँ क्यों चीख़ता हूँ क्यों भागता हूँ
यहाँ की गलियों में मैं ने लिक्खी थी जो ख़मोशी मिटा रहा हूँ

मैं एक टूटा हुआ सितारा जो कहकशाँ में फिरूँ हूँ मारा
नसीब लिक्खूंगा क्या तुम्हारा मैं तो मुझे ही मिटा रहा हूँ

ये दौर-ओ-दुनिया ग़लत पता है जहाँ मैं ग़लती से आ गया हूँ
कभी किसी से न हो ये ग़लती सो ये पता ही मिटा रहा हूँ

मिटाने की लत लगी है मुझ को ये लत मिटाने लगी है मुझ को
जो मिट चुका है जो खप चुका है उसे मैं अब भी मिटा रहा हूँ