उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main jaanta hun ki ek din yahan se niklegi

मैं जानता हूँ कि इक दिन यहाँ से निकलेगी

میں جانتا ہوں کہ اک دن یہاں سے نکلے گی

शायर: Om Awasthi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं जानता हूँ कि इक दिन यहाँ से निकलेगी
हमारी रूह बदन के मकाँ से निकलेगी

तिरे फ़रेब पे बेहतर है मैं ख़मोश रहूँ
कि तल्ख़ बात ही मेरी ज़बाँ से निकलेगी

जहाँ से आती है दोज़ख़ की आग धरती पे
ये चाँदनी भी उसी आसमाँ से निकलेगी

कटी है उम्र अकेले ही उस मुसाफ़िर की
जिसे लगा था परी दास्ताँ से निकलेगी