उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main ek nida se hara-bhara hun

मैं इक निदा से हरा-भरा हूँ

میں اک ندا سے ہرا بھرا ہوں

शायर: Umar Farhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं इक निदा से हरा-भरा हूँ
तिरी दु'आ से हरा-भरा हूँ

तिरे लिए जो रही है दिल में
उसी वफ़ा से हरा-भरा हूँ

बस एक आवाज़ है ज़रूरी
बस इक सदा से हरा-भरा हूँ

कमाल-ए-दीदा से तर-ब-तर है
मैं किस क़ज़ा से हरा-भरा हूँ

हर आरज़ू को हूँ ज़िंदा रखता
किसी फ़ना से हरा-भरा हूँ

'उमर' तसव्वुर में शिर्क कब है
मैं इक ख़ुदा से हरा-भरा हूँ