उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main ek baat kahun gar tumhein bura na lage

मैं एक बात कहूँ गर तुम्हें बुरा न लगे

میں ایک بات کہوں گر تمہیں برا نہ لگے

शायर: Daniyal Haider Jafri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं एक बात कहूँ गर तुम्हें बुरा न लगे
'अजब नहीं है ख़ुदा भी अगर ख़ुदा न लगे

वो माँ जो मेरे उजड़ने के ग़म में है लाहक़
ख़ुदा करे कि तुझे उस की बद-दु'आ न लगे

वो बद-नसीब शिकारी हैं हम निशाने पर
जो एक तीर लगे भी तो दूसरा न लगे

बनाओ मय-कदा कोई हरम के नक़्शे पर
कि मय-कदा भी हो लेकिन वो मय-कदा न लगे

मैं उस को फूल न मारूँ वो इतनी नाज़ुक थी
कि मेरा फूल कहीं उस को ज़ोर का न लगे

हमारे जैसे ज़बूँ-हाल नौजवानों की
ख़ुदा करे किसी दुश्मन को भी हवा न लगे

'अजब नहीं है तिरा ‘दानियाल-हैदर' हो
प देखने में ज़रा ‘दानियाल’ सा न लगे