उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main dil ki shahi mein KHush hun dil uski shahi mein

मैं दिल की शाही में ख़ुश हूँ दिल उस की शाही में

میں دل کی شاہی میں خوش ہوں دل اس کی شاہی میں

शायर: Umair Najmi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं दिल की शाही में ख़ुश हूँ दिल उस की शाही में
सो पाँचों उँगलियाँ घी में हैं सर कड़ाही में

ये जितनी तेज़ी से आबाद हो रही है ज़मीं
ज़ियादा वक़्त नहीं रह गया तबाही में

वो चेहरा हट गया खिड़की से बिजली आते ही
'इलाक़ा डूब गया एक दम सियाही में

न होने वाले हवादिस का डर न ख़ौफ़-ए-ज़रर
'अजीब फ़ाएदे होते हैं कम-निगाही में

किसी की हिफ़्ज़-ओ-अमाँ बन रही है मेरा जुनूँ
उसे तबाह न कर दूँ मैं ख़ैर-ख़्वाही में

वो मर चुका है किसी पर सो लड़ नहीं सकता
मगर ये कहने की हिम्मत नहीं सिपाही में

हमारे हक़ में फ़क़त एक शख़्स पेश हुआ
और आ के कुछ भी नहीं कह सका गवाही में

निज़ाम-ए-ज़ात सलीक़े से चल सकेगा अगर
दिमाग़ काम करे दिल की सरबराही में