उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main chhupne ke liye har din jagah badalne laga

मैं छुपने के लिए हर दिन जगह बदलने लगा

میں چھپنے کے لیے ہر دن جگہ بدلنے لگا

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं छुपने के लिए हर दिन जगह बदलने लगा
मगर वो तीर चलाया था जो अजल ने लगा

कोई स्टेज पर आया तो उठ खड़े हुए सब
मैं पस्ता-क़द था ज़रा दूर था उछलने लगा

ट्रेन चलने लगी और इज़्तिराब में मैं
बजाए हाथ हिलाने के हाथ मलने लगा

हवा ने दीप बुझाया न था उलट दिया था
ज़रा सी देर में सारा मकान जलने लगा

तू ज़िंदगी से निकल जाए 'ऐन मुमकिन है
मगर तू मेरे असर से नहीं निकलने लगा

ज़रा निगाह जमाई और एक बर्फ़ सा जिस्म
पसीना बन के जबीं से ज़रा पिघलने लगा

ये गुल-फ़रोश रफ़ूगर सुनार फ़ारिग़ थे
किसी के आने से इन सब का काम चलने लगा