उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main apne aap se ukta gaya hun

मैं अपने आप से उक्ता गया हूँ

میں اپنے آپ سے اکتا گیا ہوں

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं अपने आप से उक्ता गया हूँ
तुम्हारे पास रहना चाहता हूँ

उठा कर बोझ अपनी वुस'अतों का
मैं इक नुक़्ते की जानिब बढ़ रहा हूँ

मुझे कुछ हल बताओ मसअले का
दु'आ करना तो मैं भी जानता हूँ

पहुँचना है मुझे भी उस गली तक
सुख़न के रास्ते से जा रहा हूँ

किताबों ने भरम तोड़ा है वर्ना
मुझे लगने लगा था मैं नया हूँ

दरख़्शाँ हैं जो मेरी रौशनी से
ख़बर भी है उन्हें मैं बुझ चुका हूँ