उर्दू शायरी · ग़ज़ल

marka hi marka chaaron taraf

मअ'रका ही मअ'रका चारों तरफ़

معرکہ ہی معرکہ چاروں طرف

शायर: Nadeem Fazli7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मअ'रका ही मअ'रका चारों तरफ़
इक हुजूम-ए-कर्बला चारों तरफ़

तोड़ दे इस दाएरे को तोड़ दे
रास्ता है रास्ता चारों तरफ़

मुझ को कैसी ख़ामुशी दरकार थी
और कैसा शोर था चारों तरफ़

वक़्त वह जब मेरे अंदर में न था
कौन था मेरे सिवा चारों तरफ़

उमर भर मक्कार आँखों ने मुझे
वह दिखाया जो न था चारों तरफ़

अच्छे अच्छे जिस की रौ में बह गए
उस ने बाँधी वह हवा चारों तरफ़

हाए ये हम शाइरों की हाए हाए
और मुकर्रर वाह-वा चारों तरफ़