उर्दू शायरी · ग़ज़ल

log samajhte rah jaenge ek paheli ho jaegi

लोग समझते रह जाएँगे एक पहेली हो जाएगी

لوگ سمجھتے رہ جائیں گے ایک پہیلی ہو جائے گی

शायर: Deepak Kamil4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लोग समझते रह जाएँगे एक पहेली हो जाएगी
भीड़ को मैं ने छोड़ दिया तो भीड़ अकेली हो जाएगी

दीवानों की सोहबत में यूँ और तो कुछ हो ना हो लेकिन
इतना तय है नींदें बैरी रात सहेली हो जाएगी

'इश्क़ में रुस्वा 'इश्क़ में तन्हा होने वाले झूठे हैं सब
कर के देखो सुब्ह-ए-बनारस शाम-ए-बरेली हो जाएगी

जिस पल भी देखेगी तुझ को उस पल से मैं डरता हूँ
आँख मिरी ज़िद्दी बच्चे की बंद हथेली हो जाएगी