उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lahar pe bante bigaDte habab ki surat

लहर पे बनते बिगड़ते हबाब की सूरत

لہر پہ بنتے بگڑتے حباب کی صورت

शायर: Vikram6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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लहर पे बनते बिगड़ते हबाब की सूरत
हमें जो नींद भी आई तो ख़्वाब की सूरत

यहीं पे एक मुसव्विर ने जान दे दी थी
बनी न रेत पे जब उस से आब की सूरत

ये हाथ लिखने लगे इश्क़ बे-ख़याली में
बग़ौर तुझ को पढ़ा जब किताब की सूरत

सजाए फिरते हैं तम्ग़े की तरह सीने पे
ये इश्क़ जीता है हम ने ख़िताब की सूरत

ये जिन रगों में जुनूँ दौड़ता है ख़ूँ बन कर
उन्हीं ने बाँधा है दिल को तनाब की सूरत

नदी में डूब रहे तिश्ना-दीद ने देखा
नदी के बीच जज़ीरा सराब की सूरत