उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lagta hai kar ke lamba safar aa raha hun main

लगता है कर के लम्बा सफ़र आ रहा हूँ मैं

لگتا ہے کر کے لمبا سفر آ رہا ہوں میں

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लगता है कर के लम्बा सफ़र आ रहा हूँ मैं
हालाँकि घर से सीधा इधर आ रहा हूँ मैं

बस इंतिज़ार था कि तुझे छोड़ दे वो शख़्स
अब उस का इंतिज़ार न कर आ रहा हूँ मैं

ये फ़ाएदा है देख मुझ अंधे से रब्त का
तारीक रास्ता है मगर आ रहा हूँ मैं

करने लगे हैं जो नज़र-अंदाज़ उन की ख़ैर
इतना तो तय हुआ कि नज़र आ रहा हूँ मैं

मुझ तक रसाई सहल नहीं है इधर न आ
तू ख़ुद कहाँ खड़ा है ठहर आ रहा हूँ मैं

हर रोज़ क्यों पिघल के टपकता हूँ आँख से
कैसी तपिश के ज़ेर-ए-असर आ रहा हूँ मैं

कुछ भी यहाँ नया नहीं लगता मुझे 'उमैर'
शायद ज़मीं पे बार-ए-दिगर आ रहा हूँ मैं