उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lab pe aai na mere ji ki baat

लब पे आई न मेरे जी की बात

لب پہ آئی نہ میرے جی کی بات

शायर: Saa’in Alig8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लब पे आई न मेरे जी की बात
बात जब की तो की उसी की बात

बस वही एक रौशनी की बात
कौन सुनता है तीरगी की बात

जब मिले तब करूँ परी की बात
अब तो करता हूँ बस अभी की बात

देख कर रोज़-ओ-शब का फिर जाना
'अक़्ल समझी है ज़िंदगी की बात

किस ने सोचा था आदमी ही भला
सुन सकेगा न आदमी की बात

तीरगी लाख रास्ता रोके
फैल रहती है रौशनी की बात

सुन के मेरी हुए वो यूँ गोया
जब भी की तू ने बस वही की बात

रूठ जाने का ख़दशा था 'साइन'
वर्ना कह लेते ख़ुद से जी की बात