उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyun chhupate ho kidhar jaana hai

क्यूँ छुपाते हो किधर जाना है

کیوں چھپاتے ہو کدھر جانا ہے

शायर: Balwan Singh Azar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यूँ छुपाते हो किधर जाना है
दश्त से कह दो कि घर जाना है

दाद दे कोई मिरी दस्तक को
जिस ने दीवार में दर जाना है

ख़ाक तो ख़ाक पे आ बैठेगी
ख़ाक को उड़ के किधर जाना है

फेंक कर शोर शराबा दिल का
ख़ुद से चुप चाप गुज़र जाना है