उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyon KHush hai us ka KHat jo tere nam aa gaya

क्यों ख़ुश है उस का ख़त जो तिरे नाम आ गया

کیوں خوش ہے اس کا خط جو ترے نام آ گیا

शायर: Qadr Oraizi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यों ख़ुश है उस का ख़त जो तिरे नाम आ गया
क्या आसमान से कोई पैग़ाम आ गया

तकलीफ़ दूर हो गई आराम आ गया
मरना तड़प तड़प के मिरा काम आ गया

होने दो जितनी लग़्ज़िश-ए-मस्ताना हो सके
आने दो ठोकरों में अगर जाम आ गया

दुनिया में आने वाले की तक़्सीर कुछ नहीं
दुनिया से जाने वाले पे इल्ज़ाम आ गया

जाते हैं वज़’-दार कहीं छोड़ कर क़फ़स
आने दो गर बहार का पैग़ाम आ गया

तू भी तो ऐ मुसाफ़िर-ए-हस्ती क़याम कर
मंज़िल पे आफ़्ताब सर-ए-शाम आ गया

सब कुछ तसव्वुरात में आता है अब नज़र
ऐ 'क़द्र' अपना ज़ौक़-ए-नज़र काम आ गया