उर्दू शायरी · ग़ज़ल

azizo na puchho kahan rah gaya

अज़ीज़ो न पूछो कहाँ रह गया

عزیزو نہ پوچھو کہاں رہ گیا

शायर: Qadr Oraizi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अज़ीज़ो न पूछो कहाँ रह गया
जहाँ जी लगा बस वहाँ रह गया

जो रहना था बर्क़-ए-तपाँ रह गया
क़फ़स जल गया आशियाँ रह गया

हुआ मुंदमिल ज़ख़्म-ए-तीर-ए-नज़र
मगर दिल पे उस का निशाँ रह गया

गया आशियाना ज़माना हुआ
फ़क़त अब ग़म-ए-आशियाँ रह गया

ये दोनों भी मंज़िल पे पहुँचे मगर
ग़ुबार उड़ गया कारवाँ रह गया

जहाँ कारवाँ का हुआ था क़ियाम
वहाँ कारवाँ का निशाँ रह गया

इधर वहशत-ए-दिल मुझे ले उड़ी
उधर होश दामन-कशाँ रह गया

कहो बंदा-पर्वर हो किस सोच में
अभी क्या कोई इम्तिहाँ रह गया

हर इक चीज़ ऐ 'क़द्र' आई गई
ग़म-ए-इश्क़ ही जावेदाँ रह गया