उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya mera hi chehra hai

क्या मेरा ही चेहरा है

کیا میرا ہی چہرا ہے

शायर: Umar Farhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या मेरा ही चेहरा है
जिस को सालों देखा है

सूरज रात के आँगन से
बिल्कुल तन्हा बैठा है

उस को ले कर बाँहों में
प्यार ज़ियादा करना है

इश्क़-गज़ीदा राही को
रोना भी तो पड़ता है

भरे-पुरे कमरे के बीच
मेरा दिल ही तन्हा है

आज का 'फ़रहत' हर लम्हा
आने वाले कल का है