उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh is tarah se bhi KHud ko ab motabar karunga

कुछ इस तरह से भी ख़ुद को अब मो'तबर करूँगा

کچھ اس طرح سے بھی خود کو اب معتبر کروں گا

शायर: Nadeem Najid3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ इस तरह से भी ख़ुद को अब मो'तबर करूँगा
मैं रंज उठाते हुए चराग़ों में घर करूँगा

तुम्हारे भीगे बदन की ख़ुशबू का हाथ थामे
ऐ 'इश्क़-ज़ादी मैं तुम में 'उम्रों सफ़र करूँगा

ऐ हुस्न-ज़ादी मैं तुझ बदन की पहाड़ियों से
ख़ुदा को देखूँगा और सब को ख़बर करूँगा