उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh apni tishnagi se KHush nahin hun

कुछ अपनी तिश्नगी से ख़ुश नहीं हूँ

کچھ اپنی تشنگی سے خوش نہیں ہوں

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ अपनी तिश्नगी से ख़ुश नहीं हूँ
कुछ इस उथली नदी से ख़ुश नहीं हूँ

मुझे सूरज से कुछ शिकवा नहीं है
मैं अपनी रौशनी से ख़ुश नहीं हूँ

इरादा तो नहीं है ख़ुदकुशी का
मगर मैं ज़िंदगी से ख़ुश नहीं हूँ

वो मेरी लब-कुशाई से ख़फ़ा हैं
मैं उन की ख़ामुशी से ख़ुश नहीं हूँ

बदन और रूह मुझ को खींचते हैं
मैं इस रस्सा-कशी से ख़ुश नहीं हूँ

बहुत से नाम थे मैं जिन से ख़ुश था
मगर मैं अब किसी से ख़ुश नहीं हूँ