उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh alag nashw-o-numa chahti hai

कुछ अलग नश्व-ओ-नुमा चाहती है

کچھ الگ نشو و نما چاہتی ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ अलग नश्व-ओ-नुमा चाहती है
शाख़-ए-दिल बर्ग-ए-हिना चाहती है

सर-ए-अफ़्लाक बिछा चाहती है
अब मिरी ख़ाक हवा चाहती है

मेरी आवाज़ तो इक क़तरा है
ख़ामुशी सैल-ए-नवा चाहती है

फिर रग-ए-जाँ में हैं कुछ नक़्श रवाँ
कोई तस्वीर बना चाहती है

वो मसाफ़त है कि सर होने को
गाम-दर-गाम दु'आ चाहती है

मैं कि भरने में लगा हूँ ख़ुद को
और ग़ज़ल मुझ में ख़ला चाहती है