उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh aise mujhe saya-e-diwar pukare

कुछ ऐसे मुझे साया-ए-दीवार पुकारे

کچھ ایسے مجھے سایۂ دیوار پکارے

शायर: Danish Hayat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ ऐसे मुझे साया-ए-दीवार पुकारे
जैसे किसी बीमार को बीमार पुकारे

मैं देखता रहता हूँ तिरे होंट की जानिब
मैं सोचता रहता हूँ तू इक बार पुकारे

वो ऐसे पुकारे कि सिमट जाए हर इक शय
वो ऐसे पुकारे कि फ़ुसूँ-कार पुकारे

सब हँसते हुए लोगों के मुँह पर हो तमाँचा
वो शख़्स मुझे ऐसे लगातार पुकारे

हर शख़्स मुझे तेरे ‘अज़ादारों में देखे
हर शख़्स मुझे तेरा तरफ़-दार पुकारे

आईना मुझे देख के हँस दे मिरे ऊपर
दरवाज़ा मुझे देख के दीवार पुकारे

उस पर तिरी वहशत का असर है सो ये 'दानिश'
दीवाना तिरे दश्त को गुलज़ार पुकारे