उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh aata jata nahin tha mujhe siwae junun

कुछ आता जाता नहीं था मुझे सिवाए जुनूँ

کچھ آتا جاتا نہیں تھا مجھے سوائے جنوں

शायर: Umair Najmi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ आता जाता नहीं था मुझे सिवाए जुनूँ
सो वक़्त वक़्फ़ किया सब का सब बरा-ए-जुनूँ

ये मेरा ख़ाका है बचपन का वो लड़कपन का
ये इब्तिदा-ए-जुनूँ थी वो इंतिहा-ए-जुनूँ

शब-ए-शु'ऊर में दो नूर 'मीर' और 'मंसूर'
है इक ख़ुदा-ए-सुख़न दूसरा ख़ुदा-ए-जुनूँ

ख़ुदा का शुक्र मिरे गिर्द था ख़ला का हिसार
लगी तो कान तक आई नहीं सदा-ए-जुनूँ

हमारा जुर्म तफ़क्कुर था आगही थी गवाह
नतीजतन हमें दे दी गई सज़ा-ए-जुनूँ

बस एहतियाती तदाबीर पर 'अमल है 'इलाज
कि दस्तयाब नहीं है अभी दवा-ए-जुनूँ

मुझे जुनूँ का पता है ये वैसा कुछ भी नहीं
तिरे लिए तो है कुछ दिल में मावरा-ए-जुनूँ

उसे बदन नज़र आता था और ख़ाक मुझे
वो मुब्तला-ए-हवस था मैं मुब्तला-ए-जुनूँ

ये सुर्ख़ आँख हरे ज़ख़्म ज़र्द हाथ 'उमैर'
मिरे बदन पे नुमायाँ हैं रंग-हा-ए-जुनूँ