उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi ranj-o-alam nahin honge

कोई रंज-ओ-अलम नहीं होंगे

کوئی رنج و الم نہیں ہوں گے

शायर: Umar Farhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई रंज-ओ-अलम नहीं होंगे
हम पे ज़ुल्म-ओ-सितम नहीं होंगे

देखना और सुनना काम हैं दो
दीदा-ओ-दिल बहम नहीं होंगे

हम भी देखेंगे वो जहान तिरा
जहाँ रंज-ओ-अलम नहीं होंगे

भूल जाएगी हम को ये दुनिया
या'नी क़िस्से रक़म नहीं होंगे

ज़ेब-ए-क़िर्तास होगा न कोई लफ़्ज़
जो वो हुस्न-ए-क़लम नहीं होंगे

क्या ज़रूरी है उन के बा'द 'उमर'
मेरे दिल पर सितम नहीं होंगे