उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi itna be-sahaara kaise ho sakta hai yar

कोई इतना बे-सहारा कैसे हो सकता है यार

کوئی اتنا بے سہارا کیسے ہو سکتا ہے یار

शायर: Rafia Zainab5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई इतना बे-सहारा कैसे हो सकता है यार
एक मंज़र पर गुज़ारा कैसे हो सकता है यार

ख़ाक पानी और सबा का भी तो कुछ हिस्सा रहे
फूल आख़िर बस तुम्हारा कैसे हो सकता है यार

इश्क़ में हो वस्ल या के हिज्र दोनों हैं बजा
दिल का सौदा है ख़सारा कैसे हो सकता है यार

मौत से पहले करूँ तौबा मैं याद-ए-यार से
मुझ से मजनूँ को गवारा कैसे हो सकता है यार

तुझ को चाहे जो मैं उस पर वार दूँ दुनिया जहाँ
इस से बढ़ कर कोई प्यारा कैसे हो सकता है यार