उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi gham na tha magar ai pari-zad roe hum

कोई ग़म न था मगर ऐ परी-ज़ाद रोए हम

کوئی غم نہ تھا مگر اے پری زاد روئے ہم

शायर: Vikram6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई ग़म न था मगर ऐ परी-ज़ाद रोए हम
इक रस्म-भर निभाई तिरे बाद रोए हम

ये सच भी ठीक है पे तसव्वुर कमाल था
सो वस्ल में भी हिज्र किया याद रोए हम

हम को मुख़ालिफ़त की लगी लत कुछ इस क़दर
जब भी कहा किसी ने रहो शाद रोए हम

हम को हुनर मिला तो नुमाइश भी हम ने की
आते ही इस ज़मीं पे ख़ुदा-ज़ाद रोए हम

कार-ए-सवाब दीन में लाज़िम था हम पे सो
कर दी सितमगरान की इमदाद रोए हम

इतनी उदास रात थी लालच में पड़ गए
बंधन हया के तोड़ के आज़ाद रोए हम