उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kiya hai qaid ki zindan kar diya hai mujhe

किया है क़ैद कि ज़िंदान कर दिया है मुझे

کیا ہے قید کہ زندان کر دیا ہے مجھے

शायर: Lankesh Gautam9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किया है क़ैद कि ज़िंदान कर दिया है मुझे
तिरे बदन ने परेशान कर दिया है मुझे

ख़ुदी को आगही में सान कर दिया है मुझे
ख़ुद अपनी मौत का इम्कान कर दिया है मुझे

तुम्हारे हिज्र ने आँखें निचोड़ ली हैं मिरी
रुला-रुला के बयाबान कर दिया है मुझे

नक़ाब-पोश बड़ा कुफ़्र हो गया तुझ से
नज़र उठा के मुसलमान कर दिया है मुझे

इधर तो क़ल्ब ने परचम उड़ा दिया है मिरा
उधर दिमाग़ ने ए'लान कर दिया है मुझे

तमाम हुस्न हैं वैसे तो अपनी दुनिया में
पर एक शख़्स ने हैरान कर दिया है मुझे

मिला-जुला के उदासी है और कुछ भी नहीं
तिरे फ़रेब ने वीरान कर दिया है मुझे

उदास करना मुझे सहल तो नहीं यूँ भी
फिर उस ने वस्ल के दौरान कर दिया है मुझे

किसी ने अपने बदन के जमाल से 'गौतम'
तलाश-ए-रूह से बे-ध्यान कर दिया है मुझे