उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi kisi ko samajh aati hai kahani bhi

किसी किसी को समझ आती है कहानी भी

کسی کسی کو سمجھ آتی ہے کہانی بھی

शायर: Danish Hayat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी किसी को समझ आती है कहानी भी
हर एक शख़्स पे खुलते नहीं म'आनी भी

ये लोग पूछ रहे हैं तुम्हारे बारे में
मैं सोचता हूँ सुहूलत है बे-ज़बानी भी

ख़ला का रंज भी है ख़ाक से मोहब्बत भी
ज़मीन-ज़ाद भी हूँ और आसमानी भी

अब इस तरह तो बिछड़ने से कुछ नहीं होगा
कोई तो राह निकालो न दरमियानी भी

बस एक दश्त ही दीवार तक नहीं आया
हमारी सम्त सफ़र कर रहा है पानी भी

मैं जानता हूँ तिरा 'इश्क़ भी ऐ जान-ए-'हयात'
ज़रूर छोड़ के जाएगा इक निशानी भी