उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi din dusra hona paDega

किसी दिन दूसरा होना पड़ेगा

کسی دن دوسرا ہونا پڑے گا

शायर: Balwan Singh Azar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी दिन दूसरा होना पड़ेगा
मुझे अपने सिवा होना पड़ेगा

बहुत दिन से यहाँ मैं अजनबी हूँ
किसी से आश्ना होना पड़ेगा

तक़ाज़ा है बदलने का मुझे भी
पुराने को नया होना पड़ेगा

तवाज़ुन ठीक हो जाएगा 'आज़र'
भला तो हूँ बुरा होना पड़ेगा