उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis moD par le aae hain yaadon ke silsile

किस मोड़ पर ले आए हैं यादों के सिलसिले

کس موڑ پر لے آئے ہیں یادوں کے سلسلے

शायर: Danish Hayat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस मोड़ पर ले आए हैं यादों के सिलसिले
अब जो भी चाहे हम को वो जिस सम्त ले उड़े

यूँ दर्द ने रखा मिरे सीने पे इक क़दम
जैसे तमाम हो गए चाहत के मरहले

वो छोड़ कर गया जो मिरे दिल के शहर को
उस शख़्स की तलाश में रस्ते निकल पड़े

उस भूल जाने वाले को आएँगे याद हम
ढक्कन नहीं खुलेंगे जभी मर्तबान के

दीमक-ज़दा दरख़्त के साए में बैठ कर
उस ने तमाम दुख मिरी झोली में रख दिए