उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis ki aawaz thi dastaken kis ne din tumne dekha nahin tumne socha nahin

किस की आवाज़ थी दस्तकें किस ने दीं तुम ने देखा नहीं तुम ने सोचा नहीं

کس کی آواز تھی دستکیں کس نے دیں تم نے دیکھا نہیں تم نے سوچا نہیں

शायर: Lankesh Gautam5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस की आवाज़ थी दस्तकें किस ने दीं तुम ने देखा नहीं तुम ने सोचा नहीं
कितनी वहशत हुई दर खुला या नहीं तुम ने देखा नहीं तुम ने सोचा नहीं

शे'र पढ़ते हुए एक चेहरा दिखा दिल तड़पने लगा ख़ूब रोया मगर
तुम जो कहते रहे आफ़रीं आफ़रीं तुम ने देखा नहीं तुम ने सोचा नहीं

मैं हूँ उजड़े हुए शह्र-ए-ना-शाद का एक कच्चा मकाँ तुम को मा'लूम था
आँधियों में मिरी खिड़कियाँ खुल गईं तुम ने देखा नहीं तुम ने सोचा नहीं

घर में राशन भी है तन पे कपड़े भी हैं उन से यारी भी है पर उदासी का क्या
इस उदासी का क्या ऐ दिल-ए-दर्द-गीं तुम ने देखा नहीं तुम ने सोचा नहीं

'गौतम'-ए-मय-परस्त और माहौल मस्त उस पे ऐसा बदन ऐसा दीवाना-पन
कोई 'अहद-ए-वफ़ा भूल जाए कहीं तुम ने देखा नहीं तुम ने सोचा नहीं