उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwab mein jo kuchh dekh raha hun us ka dikhana mushkil hai

ख़्वाब में जो कुछ देख रहा हूँ उस का दिखाना मुश्किल है

خواب میں جو کچھ دیکھ رہا ہوں اس کا دکھانا مشکل ہے

शायर: Qamar Jameel4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाब में जो कुछ देख रहा हूँ उस का दिखाना मुश्किल है
आईने में फूल खिला है हाथ लगाना मुश्किल है

उस के क़दम से फूल खिले हैं मैं ने सुना है चार तरफ़
वैसे इस वीरान-सरा में फूल खिलाना मुश्किल है

तन्हाई में दिल का सहारा एक हवा का झोंका था
वो भी गया है सू-ए-बयाबाँ उस का आना मुश्किल है

शीशा-गरों के घर में सुना है एक परी कल आई थी
वैसे ख़याल-ओ-ख़्वाब हैं परियाँ उन का आना मुश्किल है