उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwab hain chand hai sitare hain

ख़्वाब हैं चाँद है सितारे हैं

خواب ہیں چاند ہے ستارے ہیں

शायर: Vikas Sharma Raaz8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाब हैं चाँद है सितारे हैं
शब की दीवार में दरीचे हैं

कैसे इस ख़ाक से नुमू होंगे
हम किसी दूसरी फ़ज़ा के हैं

रोज़ उसी वक़्त रात होती है
रोज़ जिस वक़्त हम बिखरते हैं

हम कि साया-मिज़ाज हैं साहब
इक ज़रा रौशनी से खुलते हैं

नींद क्यों ख़्वाब का हो मुतबादिल
ख़्वाब को ख़्वाब से बदलते हैं

मुझ को तो याद भी नहीं है अब
कौन सी रुत में फूल खिलते हैं

बस कि तुझ से थी आख़िरी उम्मीद
वक़्त तेरे भी रंग कच्चे हैं

ज़िक्र-ए-तीरा-शबी से याद आया
लफ़्ज़ को रौशनी भी कहते हैं