उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHub andaz-e-pazirai hai

ख़ूब अंदाज़-ए-पज़ीराई है

خوب انداز پذیرائی ہے

शायर: Lais Quraishi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ूब अंदाज़-ए-पज़ीराई है
इज़्ज़त-ए-नफ़्स पे बन आई है

ग़म-ए-दौराँ ग़म-ए-जानाँ ग़म-ए-जाँ
मेरी इन सब से शनासाई है

हाथ फैलाया है अपने आगे
ये गदाई है कि दाराई है

दिल के आईने में ये तू है कि मैं
एक सूरत सी नज़र आई है

तजरबा ये है कि हर ज़ुल्फ़-ए-ख़िरद
दस्त-ए-वहशत ही ने सुलझाई है

दिल को इफ़्लास का एहसास नहीं
कैसी दौलत मिरे हाथ आई है

हुस्न-ए-महसूस जिसे कहते हैं
मेरे एहसास की रानाई है

ऐ बहार-ए-लब-ओ-आरिज़ ये बता
तू किसी को कभी रास आई है

वक़्त है दर-प-ए-आज़ार मगर
'लैस' को ज़ो'म-ए-शकेबाई है