उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHushk aankhon mein bahut hain abhi aansu baqi

ख़ुश्क आँखों में बहुत हैं अभी आँसू बाक़ी

خشک آنکھوں میں بہت ہیں ابھی آنسو باقی

शायर: Danish Aligarhi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुश्क आँखों में बहुत हैं अभी आँसू बाक़ी
फूल सूखे हैं मगर इन में है ख़ुशबू बाक़ी

उन की ज़ुल्फ़ों को छुए एक ज़माना गुज़रा
आज तक है मिरे हाथों में वो ख़ुशबू बाक़ी

सब्र-ओ-तस्कीं से जो मंसूब थे वो ख़त्म हुए
दामन-ए-दिल में हैं अब जब्र के आँसू बाक़ी

क्या तिरी याद की अब हम से तवाज़ो' होगी
अब न बाक़ी है लहू दिल में न आँसू बाक़ी

रोज़-ए-तख़्लीक़ जो आवाज़ सुनी थी 'दानिश'
उस का अब तक मिरी रग-रग में है जादू बाक़ी