उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHush-mizaji ka dikhawa nahin hota mujhse

ख़ुश-मिज़ाजी का दिखावा नहीं होता मुझ से

خوش مزاجی کا دکھاوا نہیں ہوتا مجھ سے

शायर: Balwan Singh Azar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुश-मिज़ाजी का दिखावा नहीं होता मुझ से
कोई मातम भी ज़ियादा नहीं होता मुझ से

और बिखरी हुई चीज़ें तो उठेंगी ही क्या
अपना मलबा भी इकट्ठा नहीं होता मुझ से

यूँ तो मुश्किल नहीं है कुछ भी मिरे हाथों को
एक सहरा है जो दरिया नहीं होता मुझ से

ज़िंदगी तेरे त'आक़ुब में लगा रहता हूँ
और किसी ख़्वाब का पीछा नहीं होता मुझ से