उर्दू शायरी · ग़ज़ल

khula ye us se bichhaD kar ki pyar tha kitna

खुला ये उस से बिछड़ कर कि प्यार था कितना

کھلا یہ اس سے بچھڑ کر کہ پیار تھا کتنا

शायर: Qamar Sanbhali7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

खुला ये उस से बिछड़ कर कि प्यार था कितना
वो शख़्स मेरे लिए बे-क़रार था कितना

हर एक सम्त है सूरज के क़त्ल का चर्चा
फ़ज़ा-ए-शाम पे ख़ूँ का निखार था कितना

तमाम 'उम्र जला धूप धूप मेरे लिए
तिरी वफ़ा का शजर साया-दार था कितना

हक़ीक़तों के नगर में ये टूटते हुए ख़्वाब
न जाने उन पे मुझे ए'तिबार था कितना

तुम्हारे सामने आया तो बन गया पत्थर
दिल-ओ-नज़र पे मुझे इख़्तियार था कितना

हम अपने आप ही गुम हो गए तुझे पा कर
निगार-ए-सुब्ह तिरा इंतिज़ार था कितना

बिखर के रह गया शीराज़ा-ए-ख़याल 'क़मर'
शु’ऊर-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र ख़ाम-कार था कितना