उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kabhi hanse kabhi aansu bahae tanhai

कभी हँसे कभी आँसू बहाए तन्हाई

کبھی ہنسے کبھی آنسو بہائے تنہائی

शायर: Qamar Sanbhali8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कभी हँसे कभी आँसू बहाए तन्हाई
हज़ार तरह मुझे आज़माए तन्हाई

न मैं उसे न मुझे छोड़ पाए तन्हाई
जहाँ भी जाऊँ मिरे साथ जाए तन्हाई

किसे पुकारिए आवाज़ दीजिए किस को
यहाँ कोई भी नहीं है सिवाए तन्हाई

रिफ़ाक़त उस की हमारी बहुत पुरानी है
ये कौन उस से कहे घर से जाए तन्हाई

हज़ार चाहा कि ख़ुद से मिलूँ अकेले में
मगर हुई न जुदा मुझ से हाए तन्हाई

उदास छत दर-ओ-दीवार चुप फ़ज़ा ख़ामोश
अगर किताबें न हों काट खाए तन्हाई

कभी जो प्यास के काँटे मिरी ज़बाँ पे चुभें
हज़ार क़हक़हे मुझ पर लगाए तन्हाई

'क़मर' ये साथ कोई पाँच दस बरस का नहीं
तमाम 'उम्र चली साए साए तन्हाई