उर्दू शायरी · ग़ज़ल

khul gaya bhed khusrawi ke baad

खुल गया भेद ख़ुसरवी के बाद

کھل گیا بھید خسروی کے بعد

शायर: Aarib Hashmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

खुल गया भेद ख़ुसरवी के बाद
झोली भरती है आजिज़ी के बाद

आख़िरी इश्क़ जो किया मैं ने
इश्क़ पहला था आख़िरी के बाद

शाम वो सर-फिरी मिली मुझ को
आज इक और सर-फिरी के बाद

प्यार के बाद प्यार कर लेना
ख़ुद-कुशी है ये ख़ुद-कुशी के बाद

हैं ये सावन की बारिशें कैसी
हब्स होता है ताज़गी के बाद

अपने लफ़्ज़ों को छोड़ आया हूँ
साँस लेता हूँ ज़िंदगी के बाद

तुझ को 'आरिब' ख़ुदा से माँगा है
बंदगी की है बंदगी के बा'द