उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHuda ka lakh shukr hai ki sab nihan nahin rahe

ख़ुदा का लाख शुक्र है कि सब निहाँ नहीं रहे

خدا کا لاکھ شکر ہے کہ سب نہاں نہیں رہے

शायर: Faisal Mahmood6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुदा का लाख शुक्र है कि सब निहाँ नहीं रहे
जो आस्तीं के साँप थे वो अब यहाँ नहीं रहे

बहुत दिनों की बात है यहीं कहीं पे ज़ख़्म थे
ये देख कर ख़ुशी हुई कि अब निशाँ नहीं रहे

और एक दिन हम आप की ये दुनिया छोड़ जाएँगे
ख़बर मिलेगी आप को कि हम यहाँ नहीं रहे

न पहले जैसी सरकशी न दिल में कोई ख़्वाहिशें
कभी कभी तो लगता है कि हम जवाँ नहीं रहे

निकल के तेरे दिल से हम जो ला-मकाँ में खो गए
तू सोच कर ज़रा बता कि अब कहाँ नहीं रहे

हमारे दिल ने आज भी हमें कहा कि बात सुन
फुलाँ को दफ़्न कर दिया और अब फुलाँ नहीं रहे