उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHud ko itna bhi talabgar nahin karna tha

ख़ुद को इतना भी तलबगार नहीं करना था

خود کو اتنا بھی طلب گار نہیں کرنا تھا

शायर: Elma Hashmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुद को इतना भी तलबगार नहीं करना था
बात करनी थी मगर प्यार नहीं करना था

देख ग़ुस्से ने तुझे आज फ़ना कर डाला
बस यही काम तुझे यार नहीं करना था

वो तो तू ख़ुद ही मिरे सामने आया वर्ना
यार मुझ को तिरा दीदार नहीं करना था

इस में आ जाते हैं अब देख ले ऐरे-ग़ैरे
अपने दिल को तुझे बाज़ार नहीं करना था

उस ने पूछा था तुम्हें मुझ से मोहब्बत है ना
ऐसे मौक़ा' पे तो इंकार नहीं करना था

इस क़दर मरने से डरना भी नहीं था हम को
इस क़दर जीना भी दुश्वार नहीं करना था