उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHalwat mein jo dil-dar ki wahshat nahin karte

ख़ल्वत में जो दिलदार की वहशत नहीं करते

خلوت میں جو دلدار کی وحشت نہیں کرتے

शायर: Jaani Lakhnavi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ल्वत में जो दिलदार की वहशत नहीं करते
वो राह-ए-तसव्वुफ़ में करामत नहीं करते

ठोकर में पड़ा रहता है ये 'आलम-ए-रंगीं
दीवाने तो मर जाते हैं बै'अत नहीं करते

मक़्बूल-ए-ख़ुदा होने की चाहत में हम ऐसे
दिल खोल के दुश्मन से भी नफ़रत नहीं करते

हम घर ही फ़क़त जाएँ नहीं ऐसा नहीं है
सहरा भी चले जाते हैं बिद'अत नहीं करते

क्या देख रहा है तू इस अंदाज़-ए-हुनर को
हम शे'र-ओ-सुख़न बा’इस-ए-शोहरत नहीं करते

नज़राने में जो सर नहीं दे सकते हैं 'जानी'
वो सल्तनत-ए-‘इश्क़ की हसरत नहीं करते