उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHabar hai mahrumiyon se aage nikal chuka hai

ख़बर है महरूमियों से आगे निकल चुका है

خبر ہے محرومیوں سے آگے نکل چکا ہے

शायर: Jaani Lakhnavi11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़बर है महरूमियों से आगे निकल चुका है
फ़क़ीर वीरानियों से आगे निकल चुका है

हमें ये ताकीद की गई है कि हँसते रहिए
सो क़हक़हा सिसकियों से आगे निकल चुका है

ये किस तआ'क़ुब में बुझ रही हैं हमारी आँखें
ये कौन बीनाइयों से आगे निकल चुका है

मक़ाम-ए-हैरत पे अक़्ल पहुँची खुला मुअ'म्मा
क़यास हैरानियों से आगे निकल चुका है

हवास महलों में आज क़िंदील जल बुझी हैं
प इक दिया आँधियों से आगे निकल चुका है

ऐ शो'बदा-गर ख़बर है तुझ को कि शो'बदा-बीं
तिरे तमाशाइयों से आगे निकल चुका है

तबीब आब-ए-हयात लाए हैं कासा भर लो
मरीज़ आसानियों से आगे निकल चुका है

क़फ़स में रह कर लगा है जी ऐसे बेड़ियों से
असीर आज़ादीयों से आगे निकल चुका है

बयान के जंगलों में जिस को तलाशते हो
वो ज़ब्त की वादियों से आगे निकल चुका है

सुख़न-सलाख़ें भी ज़ंग-आलूद हो चुकी हैं
शुऊ'र भी क़ाफ़ियों से आगे निकल चुका है

फ़ना की बै'अत में आ चुका है जुनून-ए-'जानी'
बक़ा के अब ज़ावियों से आगे निकल चुका है