उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHamoshi ka sahra hun

ख़ामोशी का सहरा हूँ

خاموشی کا صحرا ہوں

शायर: Umar Farhat10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ामोशी का सहरा हूँ
इस दुनिया में तन्हा हूँ

मुझ को भी मालूम नहीं
कैसी बातें करता हूँ

यार अज़िय्यत लगती है
अश्क बहाता रस्ता हूँ

यादों की इक बूँद हूँ मैं
और आँखों में रहता हूँ

दर ख़ुद ही खुल जाता है
मैं कब दस्तक देता हूँ

तुझ को भी कुछ जल्दी है
मैं भी जाने वाला हूँ

याद करो आबाद करो
तेरा गुज़रा लम्हा हूँ

तोहमत का दर बाज़ हुआ
या'नी मैं भी सच्चा हूँ

फिर से मेरा हाथ पकड़
या'नी गिरने वाला हूँ

आँखें सुर्ख़ तो होंगी 'उमर'
ख़्वाबों का रखवाला हूँ