उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaun hai jo yahan mehman hua chahta hai

कौन है जो यहाँ मेहमान हुआ चाहता है

کون ہے جو یہاں مہمان ہوا چاہتا ہے

शायर: Daniyal Haider Jafri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कौन है जो यहाँ मेहमान हुआ चाहता है
ख़ाना-ए-दिल मिरा वीरान हुआ चाहता है

रंग पे रंग बदलती है ये दुनिया कैसे
क्या से क्या दर्द का 'उन्वान हुआ चाहता है

उन की हिजरत पे फ़क़त ये दिल-ए-नादाँ ही नहीं
शहर का शहर ही सुनसान हुआ चाहता है

देख तो एक नज़र इस को ये तेरा बिस्मिल
अब तिरी राह में क़ुर्बान हुआ चाहता है

तुझ पे 'हैदर' ने हैं इस दर्जा रक़म की ग़ज़लें
अब तो ये साहिब-ए-दीवान हुआ चाहता है

मर गया आज वो दीवाना सा शा'इर लड़का
ले तिरे शहर में ए'लान हुआ चाहता है

आप का हिज्र में कुछ भी नहीं जाना लेकिन
मेरा हर पल यहाँ नुक़्सान हुआ चाहता है

छोड़ दो मुझ को मिरे हाल पे लोगो जाओ
अब मुझे 'इश्क़ का 'इरफ़ान हुआ चाहता है

इक मो'अम्मा है जो बाला-ए-ख़िरद है 'हैदर'
आदमी हज़रत-ए-इंसान हुआ चाहता है