उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaun apna hai aur paraya hai

कौन अपना है और पराया है

کون اپنا ہے اور پرایا ہے

शायर: Yaseen Ansari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कौन अपना है और पराया है
अब ये अपनी समझ में आया है

धूप का तय किया सफ़र बरसों
तब कहीं मेरे पास साया है

पत्थरों का है शहर और तुम ने
इस में शीशे का घर बनाया है

वो लगा है मुझे गिराने में
मैं ने चलना जिसे सिखाया है

कर के एहसान हम तो भूल गए
कर के एहसाँ कहाँ जताया है

मंज़िल-ए-'इश्क़ के मुसाफ़िर ने
कोई तो पूछे क्या गँवाया है

दिल का आँगन महक उठा 'यासीन'
कौन मेहमान बन के आया है